रतलाम: तपती गर्मी में ‘बेजुबान’ पौधों के लिए ‘संजीवनी’ बना टैंकर, विधिक सेवा प्राधिकरण और पर्यावरण प्रेमियों ने पेश की मिसाल​

In the scorching heat, a water tanker becomes a 'lifeline' for 'voiceless' plants.

रतलाम बढ़ती गर्मी और गहराते जल संकट के बीच, रतलाम के जागरूक नागरिकों और प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संकल्प दोहराया है। विश्व वन दिवस और विश्व जल दिवस की पूर्व संध्या पर, विधिक सेवा प्राधिकरण के बैनर तले बिगड़े वन क्षेत्र को नया जीवन देने के लिए विशेष सिंचाई अभियान चलाया गया।

सिंचाई का नव प्रकल्प: बूंद-बूंद से सहेजा जा रहा जीवन

पीएलवी श्री राजेश घोटीकर द्वारा संयोजित ‘बिगड़े वन सुधार कार्यक्रम’ के अंतर्गत लगाए गए पौधों को बचाने के लिए ग्रीष्मकालीन सिंचाई का मोर्चा संभाला गया।

नवाचार: भीषण गर्मी में पौधों को सूखने से बचाने के लिए पानी के टैंकरों के माध्यम से सिंचाई का ‘नव प्रकल्प’ शुरू किया गया है।

​NALSA की पहल: नालसा (NALSA) द्वारा आवश्यकता अनुरूप तैयार किए गए प्रोजेक्ट के सुखद परिणाम अब धरातल पर दिखाई दे रहे हैं।
​इन पर्यावरण योद्धाओं ने संभाला मोर्चा
​इस पुनीत कार्य में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई:

विधिक सेवा प्राधिकरण: पैरा लीगल वालंटियर श्री सुनील शर्मा एवं श्रीमती सुषमा श्रीवास्तव।

जिला पर्यावरण टोली: श्री दीक्षांत शर्मा, श्री नवीन पाल, श्रीमती जयश्री राठौर, श्री पुष्पराज सिंह राठौर एवं श्री टांक। ​वन विभाग: श्री देवेंद्र सिंह देवड़ा एवं उनकी टीम। पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सदस्यों ने कहा कि केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे वृक्ष बनने तक पालना हमारी जिम्मेदारी है। गर्मी के इस मौसम में टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध करवाकर इन पौधों को नया जीवन दिया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में यह क्षेत्र एक घने वन के रूप में विकसित हो सके।

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