
रतलाम। अगर आप भी खाने में शुद्ध घी के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके रोंगटे खड़े कर देगी। रतलाम में मिलावटखोरों ने जनता की सेहत के साथ जो खिलवाड़ किया है, उसका खौफनाक सच अब लैब रिपोर्ट में सामने आ चुका है।
27 फरवरी का वो छापा और अब आया ‘रिपोर्ट कार्ड’

याद दिला दें कि 27 फरवरी को कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह के कड़े निर्देशों पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने ग्लोबस सिटी स्थित ‘महाकाल ट्रेडर्स’ पर अचानक धावा बोला था। उस वक्त भारी मात्रा में संदिग्ध घी देखकर अधिकारी भी दंग रह गए थे। विभाग ने तुरंत कार्यवाही करते हुए 9 नमूने लिए थे और 1600 लीटर घी (कीमत ₹6,30,818) को सीलबंद कर दिया था।
आज जब भोपाल की राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला से इसकी जांच रिपोर्ट आई, तो बड़ा विस्फोट हुआ— जब्त किए गए घी के सभी के सभी नमूने फेल हो गए हैं!
₹310 में ‘अमृत’ या ‘धीमा जहर’?
जांच में खुलासा हुआ कि फर्म का संचालक विक्रांत त्यागी, यूपी के मुजफ्फरनगर की कंपनियों से महज 310 रुपये लीटर में यह घी मंगवा रहा था। आज के दौर में जब दूध की कीमतें आसमान छू रही हैं, तब इतने सस्ते दाम पर ‘घी’ के नाम पर क्या बेचा जा रहा था, यह अब जगजाहिर है।
ब्रांड के नाम पर धोखा: ‘मदर बेस्ट’ और ‘यूपी फ्रेश’ जैसे आकर्षक नामों की आड़ में यह गौरखधंधा चल रहा था।
नियमों की धज्जियां: ‘यूपी फ्रेश’ के पैकेटों पर तो यह तक नहीं लिखा था कि अंदर आखिर है क्या!

अब होगा मिलावट के साम्राज्य का ‘द एंड’
खाद्य सुरक्षा अधिकारी शैलेश गुप्ता ने कड़े शब्दों में कहा है कि रिपोर्ट में घी ‘अवमानक’ (Substandard) पाया गया है। अब खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत इस पूरे 1600 लीटर नकली घी को नष्ट (विनिष्ट) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
चेतावनी: प्रशासन की इस बड़ी कार्यवाही ने मिलावटखोरों के सिंडिकेट में हड़कंप मचा दिया है। सस्ते के लालच में सेहत से समझौता करना आपके परिवार पर भारी पड़ सकता है।
सावधान रहें, सुरक्षित रहें!
