
रतलाम। जहाँ एक ओर आज के आधुनिक दौर में खेती पूरी तरह से मशीनीकृत हो चुकी है, वहीं रतलाम जिले के ग्राम कलमोड़ा में एक किसान आज भी परंपरा और सादगी के साथ बैलों के जरिए अपनी धरती का सीना चीरकर अनाज उगा रहा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; चोरों ने इस गरीब किसान की आजीविका के एकमात्र सहारे, उसकी सफेद बैलों की जोड़ी पर हाथ साफ कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम कलमोड़ा निवासी किसान बाबूलाल जाट ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए अपने ‘रिमाइंडर आवेदन’ में आपबीती सुनाई है। बाबूलाल के पास सफेद रंग के दो बैल थे, जिनसे वह अपनी खेती-किसानी का कार्य करते थे। बीते 6 अप्रैल 2024 को अज्ञात बदमाशों ने उनके घर के सामने से ही इन बैलों को चोरी कर लिया।
पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट किसान
बाबूलाल का कहना है कि उन्होंने घटना के तुरंत बाद बिलपांक थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी थी। पुलिसकर्मियों ने आश्वासन तो दिया कि “जैसे ही बैलों की जानकारी मिलेगी, हम बता देंगे,” लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। थक-हारकर किसान ने अब पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि उसके बैलों को जल्द खोजा जाए ताकि वह अपनी खेती का काम फिर से शुरू कर सके।
भावनाओं से जुड़ी है ये चोरी
यह केवल दो पशुओं की चोरी नहीं है, बल्कि एक किसान के संघर्ष की कहानी है। आज जब लोग लाखों के ट्रैक्टरों से खेती कर रहे हैं, बाबूलाल जैसे किसान अपनी मेहनत और बैलों के भरोसे परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। बैलों की चोरी ने न केवल उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है, बल्कि बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में उन्हें असहाय बना दिया है।
मुख्य बिंदु जो खबर को खास बनाते हैं:
परंपरा बनाम आधुनिकता: मशीनी युग में भी पुरानी पद्धति से खेती करने का जज्बा।
आजीविका पर संकट: बैलों के बिना किसान का खेती कार्य पूरी तरह ठप।
प्रशासनिक सुस्ती: 10 दिन बाद भी पुलिस द्वारा कोई सुराग न लगा पाना।
