
शिवपुर (दशरथ सोलंकी): जब सरकारी तंत्र से उम्मीदें खत्म हो गईं, तो शिवपुर के किसानों ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की। ग्राम पंचायत द्वारा 15 साल पहले बनाई गई ग्रेवल सड़क पूरी तरह जर्जर होकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी थी, जिससे किसानों का खेतों तक जाना दूभर हो गया था। प्रशासन से गुहार लगाने के बजाय, ग्रामीणों ने चंदा जुटाया और खुद ही रास्ता दुरुस्त कर लिया।
प्रमुख बिंदु:
- जनसहयोग से निर्माण: किसान अरुण शर्मा की पहल पर सभी किसान एकजुट हुए और आपसी सहयोग से 91 हजार रुपये एकत्रित किए।
- 3 दिन की मेहनत: जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से महज 3 दिन में 3 किलोमीटर लंबा मार्ग तैयार किया गया।
- नदी को भी मिला जीवन: सड़क के लिए मिट्टी कूड़ेल नदी की खुदाई से निकाली गई। इससे नदी गहरी हुई है, जिससे जल संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
- लागत का विवरण: सड़क बनाने में 200 ट्रॉली मिट्टी का उपयोग हुआ। इसमें जेसीबी (20 हजार), ट्रैक्टर किराया (65 हजार) और लेवलिंग मशीन (6 हजार) का खर्च किसानों ने खुद वहन किया।
अगला लक्ष्य:
किसान उमाशंकर पाटीदार और सत्यनारायण प्रजापत ने बताया कि इस सफल मुहिम के बाद अब किसान शिवपुर से इटावामाता जी मार्ग और अन्य कृषि रास्तों को भी इसी तरह जनसहयोग से सुधारने की तैयारी कर रहे हैं।
”खेतों तक फसल लाना और बारिश में निकलना असंभव हो गया था। अब किसानों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी।” — अरुण शर्मा, स्थानीय किसान
फोटो: दशरथ सोलंकी
