
रतलाम। शहर के गौशाला रोड स्थित नरसिंह मंदिर में नरसिंह जयंती का पर्व इस बार भी अपनी भव्यता और अनूठी परंपरा के लिए चर्चा में रहा। वैशाख शुक्ल चतुर्दशी के अवसर पर भगवान नरसिंह के प्राकट्य और असुर राज हिरण्यकश्यप के वध के अद्भुत मंचन ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
खंभा फाड़कर निकले प्रभु, पुतले का किया दलन

कार्यक्रम की शुरुआत शाम 6 बजे हुई। जैसे ही मंदिर प्रांगण में खड़े हिरण्यकश्यप के विशालकाय पुतले ने खंभे पर प्रहार किया, ढोल-नगाड़ों की गूँज और शंखध्वनि के बीच खंभा फट गया। भगवान नरसिंह के रूप में सजे पात्र ने खंभे से प्रकट होते ही अहंकारी हिरण्यकश्यप के पुतले को चीरकर उसका वध कर दिया।
अधर्म के प्रतीक पुतले के दलन के साथ ही पूरा परिसर ‘नरसिंह भगवान की जय’ के जयघोष से गूंज उठा। इस दृश्य को अपनी आंखों में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटे थे।
भक्तिमय रहा माहौल
वध के पश्चात भगवान नरसिंह की भव्य महाआरती उतारी गई। भक्तों के बीच भारी उत्साह देखा गया और सभी ने कतारबद्ध होकर भगवान के दर्शन किए।
हाइलाइट्स:
विशाल पुतला: हिरण्यकश्यप का विशेष पुतला तैयार किया गया था, जिसका मंचन के दौरान वध किया गया।
परंपरा: वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को देखने के लिए शहर के कोने-कोने से लोग गौशाला रोड पहुँचे।
महाप्रसाद: आरती के उपरांत सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया।
इस धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर रतलाम की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जीवंत कर दिया
