
बधाई हो रतलाम! मिठाई बांटिए (पिघल न जाए तो), क्योंकि आखिरकार हमने प्रदेश की साख बचा ली। जब लोग कहते थे कि रतलाम विकास की दौड़ में पीछे छूट रहा है, सफाई में नाम नहीं आ रहा, स्मार्ट सिटी की लिस्ट में हम कहीं खो गए हैं, तब कुदरत ने हमारी लाज रख ली।
45.5 डिग्री सेल्सियस! जी हाँ, पूरे मध्य प्रदेश में हम नंबर-1 हैं। गर्व से कहिए कि हम उस शहर के वासी हैं जहाँ सूरज भी ‘लैंड’ करने से पहले दो बार सोचता है।
नेताजी का चश्मा और कागजी जंगल
हमारे माननीय नेताओं और शासन-प्रशासन को इस ऐतिहासिक जीत का पूरा श्रेय जाता है। आखिर उनकी ‘वृक्षारोपण योजनाओं’ का ही तो कमाल है। कागजों पर इतने जंगल उगाए गए कि अगर उन्हें सच में जमीन पर उतार दिया जाता, तो शायद रतलाम आज ‘मिनी सिमला’ होता। पर शुक्र है प्रशासन का, उन्होंने पर्यावरण को फाइलों में कैद रखा ताकि सूरज देव बिना किसी बाधा (पेड़ों की छाँव) के सीधे हमसे रूबरू हो सकें।
नेताओं ने शहर को ‘स्मार्ट’ बनाने के चक्कर में कंक्रीट का ऐसा जाल बुना है कि अब हर सड़क तवा और हर मोहल्ला भट्टी बन चुका है। वाह! क्या दूरदर्शिता है।
सोई हुई जनता और ‘गर्म’ उपलब्धि
रतलाम की उस महान जनता को भी विशेष बधाई, जो गहरी नींद में सोई है। हम सफाई में नंबर-1 नहीं आ पाए तो क्या हुआ? भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए तो क्या हुआ? आज प्रकृति ने हमें अपनी तपिश से ‘नंबर-1’ का ताज पहना ही दिया।
”सफाई के पायदानों पर भले हम नजर न आएँ,
पर गर्मी के पायदान पर हमने झंडे गाड़ दिए हैं।
ये वो ‘विकास’ है जो पसीने की बूंद बनकर हर रतलामी की पीठ पर बह रहा है।”
तो क्या आज हमें यह 45.5 डिग्री वाली गौरवशाली उपलब्धि हासिल होती? कभी नहीं!
आज जब कूलर पानी छोड़ रहे हैं और एसी दम तोड़ रहे हैं, तब हमें गर्व होना चाहिए कि हमारे शहर का नाम पूरे प्रदेश में गूँज रहा है। भले ही यह नाम ‘हीट वेव’ की चेतावनी के साथ लिया जा रहा हो, पर कम से कम ‘नंबर-1’ तो हैं!
चलते-चलते:
अगली बार जब कोई नेता जी वोट मांगने आएं और ‘हरियाली’ की बात करें, तो उन्हें अपना चश्मा उतार कर रतलाम की तपती सड़क पर खड़ा कर दीजिएगा। शायद उन्हें बिना ‘एसी’ के विकास की असली गर्मी महसूस हो जाए।
बधाई हो रतलाम, जलते रहिए, मुस्कुराते रहिए!
