
रतलाम/जावरा (16 जून 2026)। जावरा से रतलाम के बीच महज 32 किलोमीटर की दूरी के लिए वीरभूमि और ओखा एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को सवा घंटे का समय दिए जाने की खबर का बड़ा असर हुआ है। सोशल मीडिया पर यात्रियों द्वारा उठाए गए सवालों को संज्ञान में लेते हुए डीआरएम अजमेर और डीआरएम रतलाम ने इस ‘रेलवे गणित’ पर अपनी आधिकारिक सफाई पेश की है।
रेलवे का पक्ष: क्यों दिया जाता है अतिरिक्त समय?
ट्विटर (X) पर आधिकारिक जवाब देते हुए डीआरएम रतलाम (@RatlamDRM) ने स्पष्ट किया है कि टाइम-टेबल में यह अतिरिक्त समय (टाइम बफर) जानबूझकर किसी लापरवाही के कारण नहीं, बल्कि निम्नलिखित तकनीकी कारणों से दिया जाता है:
समयबद्धता (Punctuality): ट्रेन की शुरुआत से लेकर आखिरी स्टेशन तक समयबद्धता बनाए रखने के लिए यह मार्जिन जरूरी होता है。
अपरिहार्य कारण: यात्रा के दौरान होने वाले कॉरिडोर ब्लॉक (ट्रैक मेंटेनेंस), अचानक होने वाली अलार्म चेन पुलिंग (ACP), इंजन की खराबी (Loco Failure) या मेडिकल इमरजेंसी जैसी अप्रत्याशित देरी को इस समय के जरिए कवर (Absorb) किया जाता है।
असुविधा के लिए खेद: रेलवे प्रशासन ने इस पूरी व्यवस्था के कारण यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए खेद भी प्रकट किया है।
इनसाइड न्यूज़ टिप्पणी: सुरक्षा और सुविधा में संतुलन की उम्मीद
कानूनी और तकनीकी नजरिए से रेलवे का यह तर्क बिल्कुल सही है कि ट्रेनों को लेट-लतीफी से बचाने के लिए दुनिया भर में ‘रिकवरी टाइम’ या ‘टाइम बफर’ रखा जाता है।
व्यावहारिक पहलू: हालांकि तकनीकी रूप से यह व्यवस्था सही है, लेकिन सामान्य दिनों में जब ट्रेन बिना किसी खराबी या चेन पुलिंग के दौड़ती है, तब यात्रियों को रात के सन्नाटे में आउटर पर लंबा इंतजार करना पड़ता है।
रेलवे द्वारा इस मामले पर तुरंत प्रतिक्रिया देना सराहनीय है। पूर्व स्टेशन सलाहकार समिति सदस्य मितेश अग्रवाल और आम यात्रियों को उम्मीद है कि रेलवे भविष्य में टाइम-टेबल की समीक्षा करते समय तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ यात्रियों के कीमती समय और सुविधा का भी ध्यान रखेगा।
(स्रोत: डीआरएम रतलाम का आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल @RatlamDRM)
