
भोपाल / विशेष रिपोर्ट
मध्य प्रदेश में ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में काबिज लोगों को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार पत्र (प्रॉपर्टी कार्ड) सौंपने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र व राज्य सरकार की ‘स्वामित्व योजना’ (SVAMITVA Scheme) को लेकर मैदानी स्तर पर कई व्यावहारिक चुनौतियां और तकनीकी जटिलताएं सामने आ रही हैं। एक ओर जहां प्रशासन इस योजना के जरिए ग्रामीणों को आत्मनिर्भर और संपत्ति का असली हकदार बनाने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत में ग्रामीणों और मैदानी अमले के बीच कई बिंदुओं पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ड्रोन सर्वे और सीमांकन को लेकर शिकायतेंl
योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि का ड्रोन कैमरों के जरिए डिजिटल सर्वे कराया गया था। हालांकि, कई इलाकों से ग्रामीणों द्वारा सर्वे और नक्शों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं:
सीमांकन में विसंगतियां: ग्रामीणों का आरोप है कि पुरानी चूना-लाइन और पारंपरिक बाउंड्री के मुकाबले डिजिटल मैपिंग में कुछ स्थानों पर रकबे का सही मिलान नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय स्तर पर आपसी मतभेद की स्थिति बन रही है।
सुधार प्रक्रिया में देरी: सीमांकन को लेकर दर्ज कराई गई शिकायतों और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया धीमी होने से प्रभावित ग्रामीणों में चिंता देखी जा रही है।
बैंक लोन की प्रक्रिया में व्यावहारिक अड़चनें
स्वामित्व कार्ड का मुख्य उद्देश्य यह था कि इसके आधार पर ग्रामीण बैंकों से आसानी से वित्तीय सहायता या लोन प्राप्त कर सकें। लेकिन धरातल पर स्थितियां पूरी तरह अनुकूल नजर नहीं आ रही हैं:
वित्तीय संस्थानों और बैंकों द्वारा स्वामित्व कार्ड की कानूनी स्वीकार्यता और बंधक (Mortgage) प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में ग्रामीणों को लोन मिलने में समय लग रहा है।
ग्रामीणों की मांग है कि शासन को बैंक प्रबंधन के साथ समन्वय बनाकर प्रक्रिया को और अधिक सरल व पारदर्शी बनाना चाहिए।
मैदानी अमले की भूमिका और व्यवस्थागत सवाल
योजना के क्रियान्वयन को लेकर राजस्व विभाग के निचले अमले (पटवारी व पंचायत अमले) पर कार्यभार बढ़ा है। सूत्रों के अनुसार, निष्पादन प्रक्रिया (Execution Process) और दस्तावेजों में अधिकार स्पष्टता को लेकर मैदानी स्तर पर तकनीकी स्पष्टता की दरकार है।
प्रशासनिक स्तर पर यदि ड्रोन सर्वे की त्रुटियों को त्वरित रूप से सुधारा जाए और पारदर्शी शिकायत निवारण मंच स्थापित किया जाए, तो इस जनहितकारी योजना का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुगमता से पहुंच सकेगा।
