
शिवपुर (दशरथ सोलंकी संवाददाता)। क्षेत्र से एक बेहद दुखद और चमत्कारी घटना सामने आई है। शिवपुर से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम चोरनी में गत रात्रि आकाशीय बिजली का कहर टूटा है। यहाँ स्थित करीब 200 वर्ष पुराने ऐतिहासिक भगवान लक्ष्मीनारायण व राम मंदिर पर रात करीब 9:12 बजे अचानक तेज गर्जना के साथ बिजली गिर गई। इस हादसे में मंदिर के तीनों शिखर पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं। धमाका इतना जबरदस्त था कि इसकी आवाज आसपास के 3 किलोमीटर के दायरे तक सुनी गई।
बाल-बाल बचे लोग, घरों की छतों पर गिरा मलबा
घटना के समय कुछ युवा मंदिर के बाहर ही बैठे हुए थे। प्रत्यक्षदर्शी ओम प्रकाश चौरसिया ने बताया कि रात को अचानक एक तेज चमकता हुआ धमाका हुआ और देखते ही देखते मंदिर पर बिजली गिर गई। मंदिर के पास रहने वाले प्रदीप पांचाल ने बताया कि उनका घर मंदिर के बिल्कुल सटीक है, धमाका इतना तेज था कि पल भर के लिए कुछ समझ ही नहीं आया।
बिजली गिरने से मंदिर का बीच वाला मुख्य शिखर पूरी तरह जमींदोज हो गया, वहीं आसपास के दोनों शिखर भी ढह गए। मंदिर का भारी-भरकम मलबा पास के खेतों और पड़ोस में रहने वाले राजेश चौरसिया के घर की छत पर जा गिरा। अचानक हुए इस हादसे से घर की महिलाएं और बच्चे बुरी तरह घबरा गए। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।
चमत्कार: प्रतिमाएं पूरी तरह सुरक्षित
ग्रामीणों के मुताबिक, मंदिर के तीनों शिखर सोने के (स्वर्ण जड़ित) थे। मंदिर के भीतर स्थापित भगवान राम की प्रतिमा के ठीक ऊपर वाला शिखर इस तरह से आकर गिरा कि प्रतिमा को खरोंच तक नहीं आई। मलबा गर्भगृह की छत पर इस तरह ठहर गया मानो वह शिखर के ऊपर ही लगा हो। लोग इसे भगवान का चमत्कार मान रहे हैं कि इतनी बड़ी आपदा में भी मूर्तियां सुरक्षित हैं।
रतलाम रियासत से जुड़ा है इतिहास
पुजारी मनोहर दास बैरागी ने बताया कि यह मंदिर करीब 200 साल पुराना है और रतलाम रियासत के समय का ऐतिहासिक धरोहर है। इस मंदिर के नाम करीब 6 बीघा जमीन है। साल 2011 में ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाते हुए मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 25 लाख रुपए की राशि एकत्रित की थी, जिसके बाद यहाँ तीनों शिखरों की स्थापना कर भव्य प्राण प्रतिष्ठा की गई थी।
ग्रामीणों ने की जीर्णोद्धार की मांग
चोरनी के ग्रामीणों ने बताया कि यह ऐतिहासिक मंदिर वर्तमान में कलेक्टर (प्रशासन) के अधीनस्थ आता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि आस्था के इस बड़े केंद्र और ऐतिहासिक धरोहर को देखते हुए जल्द से जल्द मंदिर के पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कराया जाए
