
क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और उमंग के साथ श्री श्री जगन्नाथ मंदिर की स्थापना एवं भगवान श्री जगन्नाथ, भइया बलदेव और सुभद्रा महारानी का पावन स्नान यात्रा महोत्सव बड़े ही धूमधाम से संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर आयोजित विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर पुण्य लाभ कमाया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ दिव्य अभिषेक
महोत्सव की शुरुआत सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के साथ हुई। विद्वान पंडितों द्वारा उच्चारित मंत्रों के बीच भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा जी का दिव्य महाअभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद, और पवित्र नदियों के जल से हुए इस अभिषेक के दर्शन पाकर भक्त भाव-विभोर हो उठे।
संतों का मिला सानिध्य और आशीर्वाद
इस भव्य और पावन आयोजन में पूज्य संतों का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में श्री नर्मदानन्द जी एवं श्री आनंद गिरी जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति रही। संतों ने भगवान की आरती कर देश और समाज के कल्याण की कामना की। उपस्थित जनमेदिनी को संबोधित करते हुए संतों ने जगन्नाथ संस्कृति और स्नान यात्रा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
भव्य आरती और संकीर्तन से गुंजायमान हुआ परिसर
अभिषेक के पश्चात भगवान की भव्य महाआरती उतारी गई। इसके बाद आयोजित हुए हरि नाम संकीर्तन में श्रद्धालु झूमते और नाचते नजर आए। ‘हरे कृष्ण, हरे रामा’ और ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा।
आयोजन समिति का संदेश:
समिति के सदस्यों ने बताया कि मंदिर स्थापना और स्नान यात्रा महोत्सव को लेकर भक्तों में भारी उत्साह था। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए उन्होंने सभी सहयोगियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
