32 किमी का सफर और 1.20 घंटे का समय! वीरभूमि एक्सप्रेस की ‘कछुआ चाल’ पर उठे सवाल; समझें रेलवे का खेल


​रतलाम/जावरा। भारतीय रेलवे एक तरफ रफ्तार और आधुनिकीकरण के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर कुछ ऐसी तकनीकी विसंगतियां हैं जो यात्रियों के गले नहीं उतर रहीं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला गाड़ी संख्या 19316 वीरभूमि एक्सप्रेस (उदयपुर से इंदौर) की समय-सारणी को लेकर सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।


​आंकड़ों का लाइव विश्लेषण: जावरा से रतलाम


​निर्धारित प्रस्थान (जावरा): रात 01:31 AM
​निर्धारित आगमन (रतलाम): रात 02:50 AM
​कुल दूरी: मात्र 32 किलोमीटर
​औसत गति: केवल 24 किमी/घंटा (पैसेंजर से भी धीमी)
​लेट होकर भी ‘बिफोर टाइम’ पहुंचने का जादुई विरोधाभास
​लाइव ट्रैकिंग के अनुसार, एक तय तारीख को यह ट्रेन जावरा से 22 मिनट लेट होकर रात 01:53 AM पर रवाना हुई। लेकिन, इसके बावजूद रतलाम जंक्शन पर अपने तय समय से 34 मिनट पहले यानी रात 02:16 AM पर पहुंच गई।


​सीधा गणित: ट्रेन ने जावरा से रतलाम के बीच का सफर महज 23 मिनट में पूरा कर लिया। सवाल यह है कि जब सफर 25 मिनट का है, तो टाइम-टेबल में 1 घंटा 20 मिनट क्यों अलॉट हैं?


​ओखा एक्सप्रेस में भी यही ‘खेल’


​यही कहानी गाड़ी संख्या 19576 एनडीटी ओखा एक्सप्रेस के साथ भी है। जावरा से रतलाम (33 किमी) के लिए इसे 1 घंटे 16 मिनट का समय दिया गया है। यह ट्रेन भी जावरा से 6 मिनट लेट (02:00 AM) चलकर रतलाम 4 मिनट पहले (03:06 AM) पहुंच गई। यानी सफर सिर्फ 66 मिनट में पूरा हो गया।


क्या है इसके पीछे का तकनीकी ‘रेलवे गणित’?


​जानकारों के मुताबिक रेलवे ऐसा जानबूझकर तीन मुख्य कारणों से करता है:
​रनिंग टाइम बफर: रतलाम एक व्यस्त जंक्शन है। ट्रेनें पीछे से कितनी भी लेट आएं, जंक्शन पर एंट्री ‘RIGHT TIME’ दर्ज हो सके, इसलिए आखिरी हिस्से में भारी अतिरिक्त समय (बफर) जोड़ दिया जाता है।
​वीआईपी मूवमेंट और सिग्नल्स: रात में रतलाम से दिल्ली-मुंबई रूट की प्रीमियम ट्रेनें गुजरती हैं। उन्हें रास्ता देने के लिए एक्सप्रेस ट्रेनों को आउटर या बीच के स्टेशनों पर कागजों में ही धीमा कर दिया जाता है।


​ एक्सपर्ट कमेंट: “यात्रियों के समय की बर्बादी”


​पूर्व स्टेशन सलाहकार समिति सदस्य मितेश अग्रवाल ने इस पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई है:
​”जावरा-रतलाम ट्रैक पूरी तरह दुरुस्त है। इसके बावजूद सवा घंटे का समय देना परिचालन विभाग पर सवाल खड़े करता है। रेलवे केवल अपनी कागजी रेटिंग सुधारने और ‘ऑन टाइम’ का सर्टिफिकेट पाने के लिए यात्रियों को रात में आउटर पर रोककर परेशान करता है। हम वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर इस टाइम-टेबल में सुधार की मांग करेंगे।”

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