किसान पर दोहरी मार: मावठे और तेज हवा ने बिगाड़ा गेहूं का गणित, उत्पादन आधा रहने से लागत निकालना हुआ मुश्किल

A Double Blow for Farmers: Winter Rains and Strong Winds Disrupt Wheat Calculations

शिवपुर (रतलाम)। ​ दशरथ सोलंकी इस साल मौसम की बेरुखी ने क्षेत्र के किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। पकने को तैयार गेहूं की फसल मावठे और तेज हवाओं के कारण खेतों में बिछ गई (आड़ी हो गई), जिससे न केवल दाना छोटा और पतला रह गया, बल्कि चमक फीकी पड़ने से मंडी में उचित दाम मिलना भी मुश्किल लग रहा है।

उत्पादन में 50% की भारी गिरावट

क्षेत्र के किसान योगेश शर्मा और प्रदीप केलोत्रा ने बताया कि जहां हर साल प्रति बीघा 11 से 12 क्विंटल गेहूं का उत्पादन होता था, वहीं इस बार यह घटकर मात्र 6 से 7 क्विंटल रह गया है। फसल आड़ी होने से कटाई में भी काफी दिक्कतें आईं और दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने से अब किसानों को फसल समर्थन मूल्य पर बेचने की मजबूरी दिख रही है।

खर्च और कमाई का गणित: लागत के बाद हाथ में सिर्फ ‘आठ हजार’
​एक बीघा गेहूं की खेती का पूरा गणित देखें तो किसानों की बचत बहुत कम रह गई है:

  • कार्य अनुमानित खर्च (प्रति बीघा)
  • जुताई व रोटावेटर ₹ 900
  • बीज (30 किलो) ₹ 1,000
  • खाद (DAP व यूरिया) ₹ 2,200
  • सिंचाई (5 बार) ₹ 2,000
  • कटाई (हार्वेस्टिंग) व ट्रॉली ₹ 1,400
  • कुल लागत ₹ 7,500 – ₹ 8,000
A Double Blow for Farmers: Winter Rains and Strong Winds Disrupt Wheat Calculations

सोयाबीन के बाद अब गेहूं ने तोड़ी कमर

​किसानों का कहना है कि पिछली सोयाबीन की फसल में भी कम उत्पादन और कम भाव के कारण नुकसान उठाना पड़ा था। अब रबी सीजन में गेहूं से भरपाई की उम्मीद थी, लेकिन कुदरत के कहर ने किसानों को कर्ज और चिंता के जाल में फंसा दिया है।
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