बड़ी खबर: क्या संकट में है मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा सीट? भाजपा की आपत्ति के बाद भोपाल से मंदसौर तक सियासी हड़कंप!​भोपाल से बड़ी सियासी हलचल


​मध्य प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर राजधानी भोपाल से आ रही है, जिसने सूबे के राजनैतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कांग्रेस की कद्दावर नेता, राहुल गांधी टीम की बेहद विश्वसनीय सदस्य और मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बड़ा पेंच फंसा दिया है। भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई तीखी आपत्ति के बाद अब मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा सीट संकट में घिरती नजर आ रही है।


​क्या है पूरा मामला?


​मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर गंभीर आपत्ति उठाई है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस प्रत्याशी ने अपने नामांकन पत्र (हलफनामे) में एक अपराधिक प्रकरण की जानकारी को छुपाया है। नियमों के तहत हलफनामे में किसी भी लंबित या पुराने मामले को छुपाना नामांकन रद्द होने का आधार बन सकता है। इसी तकनीकी और कानूनी पहलू को हथियार बनाकर भाजपा ने कांग्रेस खेमे में खलबली मचा दी है।


​राहुल गांधी की ‘कोर टीम’ की सदस्य हैं नटराजन


​गौरतलब है कि मीनाक्षी नटराजन का नाता रतलाम और मंदसौर संसदीय क्षेत्र से रहा है। वे कांग्रेस आलाकमान और विशेषकर राहुल गांधी की बेहद करीबी और भरोसेमंद नेताओं में शुमार की जाती हैं। यही वजह है कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा के इस अहम मुकाबले के लिए कांग्रेस ने उन पर दांव खेला था।


​नंबर गेम में मजबूत थी कांग्रेस, लेकिन…


​वर्तमान मध्य प्रदेश विधानसभा में विधायकों की संख्या बल के हिसाब से मीनाक्षी नटराजन की जीत की राह बेहद आसान और प्रबल मानी जा रही थी। कांग्रेस पूरी तरह आश्वस्त थी, लेकिन भाजपा ने ऐन वक्त पर ‘लीगल गुगली’ फेंककर पूरे मामले को पेचीदा बना दिया है। राजनैतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा इस कानूनी दांवपेच के जरिए कांग्रेस के अभेद्य किले में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश कर रही है।


​अब आगे क्या? टिकी हैं सबकी नजरें


​बड़ा सवाल: क्या मीनाक्षी नटराजन का नामांकन वैध पाया जाएगा या भाजपा की आपत्ति के बाद निर्वाचन अधिकारी इसे खारिज कर देंगे?
​फिलहाल, गेंद निर्वाचन अधिकारी के पाले में है। यदि नामांकन रद्द होता है, तो यह कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। वहीं दूसरी ओर, यदि नामांकन स्वीकार हो जाता है, तो भी आगामी मतदान में कांग्रेस को अपने कुनबे को एकजुट रखना होगा। देखना दिलचस्प होगा कि इस कानूनी लड़ाई के बाद ऊंट किस करवट बैठता है और चुनावी रण में कांग्रेस के विधायक अपनी इस साख को बचाने के लिए किस तरह वोट करते हैं।

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