
रतलाम के बहुचर्चित करोड़ों रुपए के मकान धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग मामले में आरोपी पूर्व उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) प्रदीप निगम को अदालत से बहुत बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है। अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया की अदालत ने यह कड़ा फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद अब आरोपी पूर्व रजिस्ट्रार पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर हुआ था समझौता, उसी में कर दी जालसाजी
पूरा मामला जैन कॉलोनी स्थित एक बेसकीमती प्रॉपर्टी से जुड़ा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, फरियादी सुभाष जैन का सह-आरोपी संजय जैन और मनोरमा जैन के साथ पुराना विवाद चल रहा था। माननीय हाई कोर्ट इंदौर खंडपीठ के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों के बीच ₹1,90,00,000 (एक करोड़ नब्बे लाख रुपये) का एक आपसी समझौता (एग्रीमेंट) हुआ था।
इस समझौते की गारंटी के तौर पर जैन कॉलोनी स्थित मकान नंबर 40 को फरियादी सुभाष जैन के पक्ष में अनुबंधित किया गया था। अनुबंध की सबसे बड़ी शर्त यह थी कि जब तक पूरी रकम का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक इस मकान को न तो बेचा जा सकता था और न ही किसी और के नाम ट्रांसफर किया जा सकता था।
पद का दुरुपयोग और ₹1.10 करोड़ का बैंक लोन
आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर आरोपियों ने इस प्रतिबंधित मकान पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र से करीब ₹1.10 करोड़ का मोटा लोन भी पास करा लिया। इसके बाद खेल शुरू हुआ रजिस्ट्रार ऑफिस की मिलीभगत का। तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार प्रदीप निगम (पिता वृंदावन निगम) ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए, फरियादी सुभाष जैन की अनुपस्थिति में और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के, इस रजिस्टर्ड अनुबंध पत्र को एकपक्षीय तरीके से निरस्त (कैंसिल) कर दिया। इस बड़ी साठगांठ के कारण फरियादी को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा और वह अपने वैध मालिकाना हक से वंचित रह गया।
इन गंभीर धाराओं में दर्ज है मुकदमा,
फरियादी की शिकायत के बाद थाना स्टेशन रोड पुलिस ने तत्कालीन रजिस्ट्रार प्रदीप निगम व अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 1023/24 के तहत भारतीय दंड संहिता (IPC) की इन गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है:
धारा 420: धोखाधड़ी और जालसाजी
धारा 467: मूल्यवान सुरक्षा/दस्तावेजों की कूटरचना
धारा 468: धोखाधड़ी के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार करना
धारा 471: फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना
