
रतलाम। देशभर में गौवंश की दुर्दशा, तस्करी और हत्याओं पर अंकुश लगाने के लिए ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत एक व्यापक मुहिम शुरू की गई है। इस अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत प्रार्थना पत्र भेजकर मांग की गई है कि भारत में ‘संपूर्ण देशी गौवंश’ की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाया जाए और पृथक ‘गो पालन मंत्रालय’ की स्थापना की जाए।
रतलाम से उठी देशव्यापी मांग
अभियान के तहत स्थानीय प्रशासन (तहसीलदार/एसडीएम/कलेक्टर) के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजे गए इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में गौवंश की स्थिति अत्यंत पीड़ादायक है। रतलाम जिले सहित पूरे मध्य प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर गौवंश की दुर्दशा, तस्करी और वध की घटनाओं से समाज में गहरा रोष है।
प्रार्थना पत्र में की गई मुख्य 8 मांगें:
केंद्रीय कानून और मंत्रालय: गौवंश पर पूर्ण प्रतिबंध हेतु संविधान के अनुच्छेद 48 के तहत एक एकीकृत केंद्रीय कानून बने और स्वतंत्र ‘गो सेवा एवं संरक्षण मंत्रालय’ का गठन हो।
संवैधानिक मान्यता: देशी गौवंश को ‘राष्ट्रमाता’ या ‘राष्ट्र आराध्या’ के रूप में आधिकारिक संवैधानिक मान्यता दी जाए।
कठोर दंड का प्रावधान: गौ-तस्करी और वध को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखकर आजीवन कारावास और संपत्ति कुर्क करने जैसे सख्त कानून बनें।
आर्थिक आत्मनिर्भरता: गोबर और गोमूत्र के अनुसंधान को बढ़ावा देकर उसे सरकारी खरीद तंत्र से जोड़ा जाए, ताकि किसान आत्मनिर्भर बन सकें।
बुनियादी ढांचा: प्रत्येक ग्राम पंचायत में ‘नंदीशाला’ और जिला स्तर पर ‘आदर्श गौ अभयारण्य’ का निर्माण अनिवार्य हो।
राजमार्ग सुरक्षा: नेशनल हाईवे पर हर 50 से 100 किमी पर ‘गो-वाहिनी एम्बुलेंस’ और ट्रामा सेंटर की व्यवस्था हो ताकि दुर्घटनाग्रस्त गौवंश को तुरंत उपचार मिल सके।
शिक्षा में समावेश: स्कूली पाठ्यक्रम में ‘गो-विज्ञान’ को एक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए।
गौचर भूमि की मुक्ति: अतिक्रमण की गई गौचर (चरागाह) भूमि को मुक्त कराया जाए और ‘गोचर विकास बोर्ड’ का गठन हो।
अर्थव्यवस्था और संस्कृति का आधार है गौवंश
पत्र में उल्लेख किया गया है कि गौवंश केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी भी है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना तभी साकार होगा जब किसान रासायनिक खाद के विषैले चक्र से मुक्त होकर गौ-आधारित प्राकृतिक कृषि को अपनाएगा।
इस अभियान को समस्त संत समाज, गौ-भक्तों और जागरूक नागरिकों का समर्थन प्राप्त है। अभियान का लक्ष्य देश के लाखों नागरिकों के हस्ताक्षर युक्त समर्थन के साथ इस आवाज को दिल्ली तक पहुँचाना है, ताकि भारतीय संस्कृति के प्रतीक गौवंश को उसका खोया हुआ सम्मान वापस मिल सके।
