
रतलाम। जिला चिकित्सालय रतलाम में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के साथ आए दिन होने वाली अभद्रता और मारपीट के मामलों को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों में भारी आक्रोश है। नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन ने अस्पताल के सिविल सर्जन को एक ज्ञापन सौंपकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सुरक्षा बढ़ाए जाने की मांग की है। एसोसिएशन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि दो दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
ऑन-ड्यूटी डॉक्टर और नर्सिंग ऑफिसर के साथ मारपीट
मिली जानकारी के अनुसार, घटना बीती 17 मई 2026 की रात करीब 1:30 बजे की है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी ट्रायएज वार्ड में नर्सिंग ऑफिसर संघशरण सागर और डॉक्टर प्रणव मोदी अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान सुभाषनगर निवासी मरीज सोहनीबाई के परिजनों ने अचानक ऑन-ड्यूटी स्टाफ के साथ विवाद शुरू कर दिया। देखते ही देखते परिजनों ने गाली-गलौज करते हुए शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की और स्टाफ के साथ मारपीट कर दी।
मूकदर्शक बने रहे सुरक्षाकर्मी,
एसोसिएशन द्वारा सौंपे गए पत्र में अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि जब मरीज के परिजन डॉक्टरों और नर्सों के साथ मारपीट कर रहे थे, तब वहां तैनात सुरक्षाकर्मी और पुलिसकर्मी मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहे। बीच-बचाव करने के बजाय वे घटना का वीडियो बनते रहने का इंतजार करते रहे। अगर अस्पताल के अन्य कर्मचारी बीच-बचाव के लिए आगे नहीं आते, तो कोई गंभीर अनहोनी घट सकती थी।
नर्सिंग एसोसिएशन ने दी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
इस घटना से नाराज नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन की जिला शाखा ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर अपनी प्रमुख मांगें सामने रखी हैं:
दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी: घटना के दोषियों को दो दिन (48 घंटे) के भीतर गिरफ्तार किया जाए।
पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था: इमरजेंसी वार्डों में, खासकर रात्रि कालीन ड्यूटी के दौरान, पुलिस और सुरक्षा गार्डों की वास्तविक व पर्याप्त तैनाती की जाए और अनावश्यक भीड़ को बाहर रखा जाए।
परिजनों की संख्या सीमित हो: अस्पताल में वार्ड के भीतर एक मरीज के साथ अधिकतम केवल 2 अटेंडेंट (परिजनों) को ही रहने की अनुमति दी जाए।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि दो कार्यदिवसों में प्रशासन ने इस मामले में कड़े कदम नहीं उठाए, तो जिले के सभी नर्सिंग अधिकारी सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं ठप हो सकती हैं। इसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और अस्पताल प्रशासन की होगी।
