
रतलाम। त्योहारों और आम दिनों में शहरवासियों को शुद्ध दूध एवं डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा प्रशासन लगातार मुस्तैद नजर आ रहा है। इसी कड़ी में विभाग की टीम ने शहर के बाहरी रास्तों से आने वाले दूध की आकस्मिक जांच का विशेष अभियान चलाया। इस दौरान आधुनिक ‘रैपिड किट’ के जरिए मौके पर ही दूध के दर्जनों सैंपलों का परीक्षण किया गया, जिसमें राहत की बात यह रही कि सभी नमूने मानक स्तर (शुद्ध) पाए गए।
दूध वाहनों को रोककर की गई ऑन-द-स्पॉट चेकिंग
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने तड़के ही शहर के प्रवेश मार्गों पर नाकेबंदी कर बाहर के ग्रामीण एवं सीमावर्ती क्षेत्रों से दूध लेकर आ रहे टैंकरों, गाड़ियों और दूधियों की टंकियों से सैंपल लिए। मिलावट की तुरंत पहचान करने के लिए टीम ने उन्नत टेक्नोलॉजी वाली रैपिड टेस्टिंग किट का इस्तेमाल किया।
मिलावटखोरी पर लगाम लगाने की पहल
जांच प्रक्रिया के दौरान दूध में पानी की मात्रा, यूरिया, डिटर्जेंट, स्टार्च, सिंथेटिक केमिकल और केमिकल प्रिजर्वेटिव की उपस्थिति की सघन जांच की गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि रैपिड किट के जरिए महज कुछ ही मिनटों में परिणाम सामने आ जाते हैं, जिससे मिलावटी दूध को शहर में प्रवेश करने से पहले ही रोका जा सकता है।
सभी सैंपल पाए गए मानक के अनुरूप
अभियान के दौरान जांचे गए सभी दूध के नमूने तय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरे उतरे। किसी भी सैंपल में कोई हानिकारक मिलावट नहीं पाई गई। जांच रिपोर्ट संतोषजनक आने के बाद वाहनों को शहर में आपूर्ति के लिए जाने दिया गया।
विभाग का सख्त संदेश
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों को बख्शा नहीं जाएगा। यह जांच अभियान आगे भी इसी तरह अचानक और अलग-अलग रास्तों पर जारी रहेगा। विभाग ने सभी दूध विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण दूध की ही बिक्री करें, अन्यथा पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
