
रतलाम, 20 मई। मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के बेहद वरिष्ठ नेता हिम्मत कोठारी को जब न्याय के लिए खुद सिस्टम से लड़ना पड़े, तो जिले की कानून व्यवस्था और आम जनता की सुनवाई पर बड़े सवाल खड़े होना लाजिमी है। मीसा बंदी के प्लॉट पर हुए अवैध कब्जे के मामले में पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने से नाराज होकर बुधवार दोपहर पूर्व गृह मंत्री अचानक पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के बाहर जमीन पर ही धरने पर बैठ गए। एक कद्दावर भाजपा नेता के इस तरह अचानक धरने पर बैठने से पुलिस महकमे और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया।
एसपी ने चेंबर में ले जाकर दिया ठोस आश्वासन
जैसे ही पूर्व गृह मंत्री के धरने पर बैठने की सूचना रतलाम पुलिस अधीक्षक अमित कुमार को मिली, वे तुरंत अपने कार्यालय से बाहर आए। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए श्री कोठारी को समझाइश देकर जमीन से उठाया और ससम्मान अपने चेंबर में ले गए। चेंबर में चर्चा के दौरान एसपी अमित कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई करने सहित आरोपियों के खिलाफ पुलिस प्रकरण (एफआईआर) दर्ज करने का ठोस आश्वासन दिया।
आर-पार के मूड में हिम्मत कोठारी: ‘नहीं मिला न्याय तो करूँगा आमरण अनशन’
चेंबर में चर्चा के बाद पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी ने मीडिया और प्रशासन से साफ लफ्जों में कहा:
”अगर मीसा बंदियों को उनका प्लॉट वापस नहीं दिलाया गया और दोषियों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो मैं आमरण अनशन पर बैठूँगा। इस संबंध में मैं भाजपा के शीर्ष नेतृत्व (पार्टी मुखिया) से भी बात करूँगा। इसके बावजूद अगर कोई समस्या का समाधान नहीं होता है, तो मैं पार्टी छोड़ने से भी पीछे नहीं हटूँगा और सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करूँगा।”
उल्लेखनीय है कि श्री कोठारी ने चार दिन पूर्व भी इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की थी और पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए उचित कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन कोई ठोस कदम न उठाए जाने से नाराज होकर आखिरकार उन्हें बुधवार को यह कदम उठाना पड़ा।
लापरवाही पर थाना प्रभारी को नोटिस, तुरंत केस दर्ज करने के निर्देश
पूर्व गृह मंत्री के कड़े रुख के बाद पुलिस अधीक्षक ने तत्काल कड़ा रुख अपनाते हुए दीनदयाल नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव को निर्देशित किया कि वे इस मामले में तुरंत पुलिस प्रकरण (एफआईआर) दर्ज करें। इसके साथ ही एसपी ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में उचित कार्रवाई करने में कोई ढिलाई बरती गई, तो थाना प्रभारी अनुराग यादव को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस भी जारी किया जाएगा।
बड़ा सवाल: जब ‘अपनों’ की नहीं सुनवाई, तो आम आदमी कहाँ जाए?
इस पूरे घटनाक्रम ने रतलाम पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। राजनीतिक गलियारों और जनता के बीच अब यही सबसे बड़ा सवाल तैर रहा है कि जब सूबे के पूर्व गृह मंत्री और सत्ताधारी दल के इतने कद्दावर नेता को अपनी बात मनवाने और न्याय पाने के लिए एसपी दफ्तर के बाहर जमीन पर बैठना पड़ रहा है, तो फिर रतलाम की आम जनता की सुनवाई कैसे और कहाँ होती होगी? क्या आम आदमी के आवेदनों पर थाने में सिर्फ धूल खानी ही बची है?
