
रतलाम: मध्य प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर सरकार के समक्ष मोर्चा खोल दिया है। मध्य प्रदेश आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ ने जिलाधीश (रतलाम) के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें अपनी 10 प्रमुख मांगों को पूरा करने का आग्रह किया है।
अतिरिक्त बोझ और मानसिक दबाव से परेशान कार्यकर्ता
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं पिछले 50 वर्षों से शासन की सभी कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक की सभी सरकारी योजनाओं में इनका सहयोग लिया जाता है। आरोप है कि जो कार्य लाखों रुपये वेतन पाने वाले नियमित कर्मचारी नहीं करते, वे कार्य भी इन अल्प मानदेय वाली कार्यकर्ताओं से कराए जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जनगणना, लाडली बहना योजना, मतदाता पुनरीक्षण और सर्वे जैसे अन्य विभागीय कार्यों के कारण उन्हें मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।
संघ की प्रमुख 10 मांगें:
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
इन्हें न्यूनतम पेंशन के रूप में 5,000 रुपये प्रदान किए जाएं।
सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए।
कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में मौजूद अंतर को समाप्त किया जाए।
सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर आश्रित बहू या बेटी को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
कार्य पूर्ण होने पर सालाना राशि कम से कम 5 लाख रुपये दी जाए।
सभी केंद्रों पर जीट (JIT) की आपूर्ति केंद्रों पर ही सुनिश्चित की जाए।
आयु सीमा का बंधन हटाकर कार्यकर्ताओं को पदोन्नति दी जाए।
विभागीय कार्यों के अलावा अन्य सभी गैर-विभागीय कार्यों से मुक्त रखा जाए।
किसी भी अधिकारी द्वारा सेवा से पृथक करने की मनमानी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
आंगनवाड़ी संघ ने सरकार से अपील की है कि उनके द्वारा किए जा रहे अथक प्रयासों को देखते हुए इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए और जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए।
