
रतलाम। मध्य प्रदेश में शासकीय कर्मचारियों का असंतोष गहराता जा रहा है। पदोन्नति नीति लागू न होने और बीते 30 वर्षों से लंबित वेतनमान विसंगतियों का समाधान न मिलने के विरोध में मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने 3 अगस्त से अनिश्चितकालीन ‘कलमबंद हड़ताल’ का ऐलान किया है। इस हड़ताल से प्रदेश के साथ-साथ रतलाम जिले सहित सभी तहसीलों में जमीन-जायदाद, नामांतरण और सीमांकन से जुड़े प्रशासनिक कार्य पूरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
30 वर्षों से लंबित हैं मांगें
पटवारी संघ का कहना है कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में कर्मचारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया जारी है, लेकिन पटवारी संवर्ग को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। संघ की मुख्य मांगें हैं:
पदोन्नति नीति: पटवारी संवर्ग के लिए स्पष्ट और पारदर्शी प्रमोशन नीति तुरंत लागू की जाए।
वेतनमान विसंगति: पिछले तीन दशकों (30 वर्षों) से चली आ रही वेतनमान से जुड़ी विसंगति का स्थाई निराकरण किया जाए।
15 जुलाई से जारी था चरणबद्ध आंदोलन
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष गोपाल रावत के अनुसार, अपनी जायज मांगों को लेकर संघ द्वारा 15 जुलाई से ही चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा था। शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए कई बार ज्ञापन सौंपे गए और मांगें उठाई गईं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
”सरकार की ओर से उपेक्षा के कारण पटवारियों में गहरा असंतोष है। जब तक पदोन्नति नीति लागू कर वेतन विसंगति का समाधान नहीं किया जाता, तब तक हमारा कलमबंद आंदोलन जारी रहेगा।”
— गोपाल रावत, जिलाध्यक्ष, मध्यप्रदेश पटवारी संघ
जनता पर पड़ेगा सीधा असर
3 अगस्त से शुरू हो रही इस हड़ताल के कारण आम जनता और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हड़ताल के दौरान निम्नलिखित कार्य प्रभावित होने की आशंका है:
आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र से संबंधित पटवारी रिपोर्ट।
जमीनों का नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन (नाप-जोख)।
फसलों के गिरदावरी का काम और आपदा राहत राशि से जुड़े सर्वे।
