
भोपाल। मध्यप्रदेश के निजी विद्यालयों की समस्याओं का निराकरण न होने से असंतोष गहराता जा रहा है। मध्यप्रदेश प्रांतीय अशासकीय शिक्षण संस्था संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर 10 सूत्रीय मांगों के त्वरित निराकरण की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो 21 अगस्त से प्रदेशभर में कलम बंद हड़ताल और इसके बाद चरणबद्ध उग्र आंदोलन किया जाएगा।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष दीपेश ओझा ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि निजी विद्यालय लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय समस्याओं से जूझ रहे हैं। संघ की मुख्य मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
RTE फीस प्रतिपूर्ति: सत्र 2024-25 और 2025-26 की लंबित RTE फीस प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान रक्षाबंधन से पूर्व तत्काल किया जाए।
निजी स्कूल प्रोटेक्शन एक्ट: डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों की तर्ज पर निजी विद्यालयों के संचालकों, प्राचार्यों और शिक्षकों के लिए प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो तथा जानलेवा हमलों को गैर-जमानती अपराध घोषित किया जाए।
स्थाई मान्यता: कक्षा 1 से 12वीं तक के नवीनीकरण की जगह स्थाई मान्यता प्रदान की जाए।
TET की अनिवार्यता समाप्त हो: D.El.Ed., D.Ed. और B.Ed. प्रशिक्षित शिक्षकों के कार्यरत होने के आधार पर 31 अगस्त 2028 तक लागू TET अनिवार्यता के नियम को वापस लिया जाए।
पीली पत्रकारिता पर रोक: फर्जी और अवैध वसूली करने वाले पत्रकारों के खिलाफ सख्त कानून बनाकर कार्रवाई की जाए।
अन्य मांगें: राज्य शिक्षा सलाहकार परिषद का तत्काल गठन कर गैर-सरकारी सदस्यों को शामिल करना, जून में वार्षिक कैलेंडर जारी करना, बिना TC प्रवेश पर रोक और अनावश्यक डिजिटल आईडी प्रक्रिया का दबाव खत्म करना।
मांगें न मानने पर आंदोलन की रूपरेखा:
21 अगस्त 2026: प्रदेशव्यापी कलम बंद हड़ताल।
02 सितंबर 2026: भोपाल में शिक्षा मंत्री और उच्च अधिकारियों को रक्षा सूत्र बांधकर विरोध दर्ज कराना।
5 सितंबर 2026 (शिक्षक दिवस): काली शर्ट या काली रिबन बांधकर ‘काला दिवस’ के रूप में मनाना और भूख हड़ताल शुरू करना।
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि इसके बाद भी शासन द्वारा उचित कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेशभर के निजी विद्यालयों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी मध्यप्रदेश शासन की होगी।
