
रतलाम, 10 जुलाई 2026: मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत आमजन को समय पर सेवाएं न देना दो राजस्व अधिकारियों को भारी पड़ गया। आवेदनों के निराकरण में लापरवाही बरतने और तय समयसीमा का उल्लंघन करने पर अपर कलेक्टर श्री बृजेंद्र कुमार रावत ने दोनों अधिकारियों पर कुल 5,250 रुपये का अर्थदण्ड (जुर्माना) लगाया है।
21 मामलों में पाई गई देरी
जांच के दौरान न्यायालय नायब तहसीलदार आलोट और न्यायालय नायब तहसीलदार टप्पा कालूखेड़ा के कुल 21 प्रकरण निर्धारित समयसीमा से बाहर (लंबित) पाए गए। समय पर आवेदनों का निराकरण नहीं होने के कारण आवेदकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा, जो कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2010 के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
किस अधिकारी पर कितना लगा जुर्माना?
अधिनियम की धारा 7(1)(क) के तहत दोषी पाए जाने पर प्रशासन द्वारा निम्नलिखित कार्रवाई की गई है:
अधिकारी का नाम व पदक्षेत्रलंबित प्रकरणजुर्माने की राशि
श्री राजेश पाटीदार (नायब तहसीलदार)आलोट18 प्रकरण₹ 4,500
श्रीमती श्रद्धा द्विवेदी (नायब तहसीलदार)टप्पा कालूखेड़ा03 प्रकरण₹ 750
कुल21 प्रकरण₹ 5,250
प्रशासन का सख्त संदेश:
इस कार्रवाई से जिला प्रशासन ने साफ संकेत दे दिया है कि आम जनता के काम में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत हर नागरिक को तय समय में सेवाएं मिलना उनका कानूनी अधिकार है।
