रतलाम जिला जेल में रक्षाबंधन: सलाखों के पीछे छलका बहनों का प्यार, भाइयों की कलाई पर सजी राखी


​ :- योगेश पंवार
रक्षाबंधन के पवित्र पर्व पर रतलाम जिला जेल परिसर में अत्यंत भावुक और आत्मीय नजारा देखने को मिला। जेल में निरुद्ध अपने भाइयों को रक्षासूत्र बांधने के लिए सुबह से ही बहनों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। जेल प्रशासन द्वारा की गई विशेष व्यवस्थाओं और कड़ी सुरक्षा के बीच बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर कलाई पर राखी बांधी तथा उनकी लंबी उम्र व शीघ्र रिहाई की कामना की।


​रक्षाबंधन पर्व के महत्व को देखते हुए जेल अधीक्षक के मार्गदर्शन में परिसर में व्यापक इंतजाम किए गए थे। बहनों को अपने भाइयों से मिलने और सुगमता से राखी बांधने में कोई असुविधा न हो, इसके लिए अलग-अलग समय सारणी (स्लॉट) और सुव्यवस्थित बैठक व्यवस्था तैयार की गई थी।


​जेल प्रशासन की प्रमुख व्यवस्थाएं:


​सघन चेकिंग एवं सुरक्षा: जेल परिसर में प्रवेश देने से पहले सुरक्षा कर्मियों द्वारा सभी आगंतुकों और लाई गई सामग्रियों की बारीकी से जांच की गई।


​राखी व मिठाई की अनुमति: शासन एवं जेल नियमों के तहत बहनों को अपने साथ रोली, चावल, राखी और मिठाई ले जाने की विशेष छूट दी गई, जिससे पर्व की मिठास और परंपरा बनी रहे।


​भावुक क्षण और संकल्प: लंबे समय बाद एक-दूसरे के सामने आए भाई-बहन आपस में मिलकर भावुक हो उठे। बहनों ने भाइयों को मिठाई खिलाकर अपराध का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौटने का वचन लिया।


​जेल अधिकारियों के अनुसार, रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक और सांस्कृतिक त्यौहार बंदियों के मानसिक बदलाव और सुधारात्मक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर कैदियों ने भी अपनी बहनों को सुरक्षा का भरोसा देते हुए भविष्य में एक अच्छा नागरिक बनने का संकल्प व्यक्त किया।

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