रतलाम मंडल की अनूठी पहल: रेलवे स्कूल की छत से हटाकर बनाया ‘सोलर कारपोर्ट’, छाया के साथ मिलेगी बिजली


​रतलाम, 10 जुलाई 2026: पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने स्वच्छ और हरित ऊर्जा (Green Energy) को बढ़ावा देने की दिशा में एक नया और अनूठा प्रयोग किया है। मंडल ने रेलवे हायर सेकेंडरी स्कूल, रतलाम में पहले से स्थापित 30 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र (Solar Plant) को हटाकर, उसे एक आधुनिक ‘सोलर कारपोर्ट’ (Solar Carport) के रूप में पुनर्जीवित कर दिया है।
​इस बेहद खास और अभिनव परियोजना का लोकार्पण मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री अश्वनी कुमार ने अपर मंडल रेल प्रबंधक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।


​छत से लेकर पार्किंग तक: क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?


​दरअसल, यह सौर ऊर्जा संयंत्र पहले विद्यालय भवन की छत पर लगा हुआ था। स्कूल के नवीनीकरण और पुनर्विकास कार्य के चलते इस संयंत्र को छत से हटाना बेहद जरूरी हो गया था। आमतौर पर ऐसे मामलों में सेटअप को स्टोर रूम में रख दिया जाता है, लेकिन रतलाम मंडल के विद्युत विभाग ने कबाड़ या वेस्ट बनाने के बजाय इसे एक नए रूप में ढालने का फैसला किया।


​क्या होता है सोलर कारपोर्ट?


सोलर कारपोर्ट एक ऐसी आधुनिक संरचना है, जिसमें गाड़ियों की पार्किंग के ऊपर ही सोलर पैनल लगा दिए जाते हैं। इससे दोहरे फायदे होते हैं:
​खाली पड़ी पार्किंग स्पेस का बेहतरीन इस्तेमाल होता है।
​गाड़ियों को धूप से बचाने के लिए शेड (छाया) मिल जाती है।
​उसी शेड के ऊपर से भारी मात्रा में बिजली का उत्पादन होता है।


​रतलाम मंडल का पहला ‘पायलट प्रोजेक्ट’


​पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) श्री मुकेश कुमार ने बताया कि यह रतलाम मंडल का अपनी तरह का पहला (पायलट) प्रोजेक्ट है। इस मॉडल की सफलता के बाद अब उन सभी रेलवे परिसरों में इसे लागू किया जा सकेगा, जहां:
​भवनों का पुनर्विकास (Redevelopment) चल रहा हो।
​या फिर पारंपरिक रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने के लिए छत पर जगह की कमी हो।


​अधिकारियों ने थपथपाई पीठ


​लोकार्पण के मौके पर DRM श्री अश्वनी कुमार ने इस नवाचार (Innovation) की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन और पार्किंग सुविधा को एक साथ जोड़ना संसाधनों के सर्वश्रेष्ठ उपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को लीड करने वाले वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर लेफ्टिनेंट डी.के. प्रजापति और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।


पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम


​30 किलोवाट क्षमता का यह सोलर कारपोर्ट न सिर्फ रेलवे की बिजली की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) को कम करने में भी मदद करेगा। अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट भविष्य में भारतीय रेलवे के अन्य मंडलों और सरकारी संस्थानों के लिए एक रोल मॉडल (प्रेरणादायी मॉडल) साबित होगा।

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