
रतलाम (मध्य प्रदेश) | पिपलोदा तहसील के ग्राम खेड़ा कलालिया से प्रशासन की एक ऐसी संवेदनहीन और हैरान करने वाली लापरवाही सामने आई है, जिसने एक जीवित महिला का अस्तित्व ही सरकारी दस्तावेजों में खत्म कर दिया। गांव की वार्ड नंबर 14 की निर्वाचित पंच रईसा बाई को ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव ने कागजों में ‘मृत’ घोषित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम खेड़ा कलालिया निवासी रईसा बाई पति जगदीशनाथ ने कलेक्टर को सौंपे अपने शिकायती आवेदन में बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ और जीवित हैं। इसके बावजूद, गांव के सरपंच गोपाल कुंवर और सचिव बापू जाट ने मिलीभगत कर उनका मृत्यु प्रमाण पत्र (नंबर: D20202307699000077) जारी करवा दिया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार रईसा बाई की मृत्यु 15 जनवरी 2023 को ही दिखाई जा चुकी है।
योजनाओं से कटा नाम, पहचान पर संकट
दस्तावेजों में मृत घोषित होने के कारण रईसा बाई को मिलने वाली तमाम शासकीय योजनाओं का लाभ बंद हो गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वह गांव की एक सक्रिय जन-प्रतिनिधि (पंच) हैं, इसके बावजूद सिस्टम ने उन्हें ‘स्वर्गवासी’ बना दिया। पीड़िता का आरोप है कि इस साजिश के पीछे उन्हें परेशान करने और उनके संवैधानिक पद के अधिकारों को छीनने की मंशा हो सकती है।
जनसुनवाई में लगाई न्याय की गुहार
पीड़िता ने रतलाम कलेक्टर को आवेदन देकर मांग की है कि:
उनका ‘मृत्यु डेटा’ तत्काल सुधारा जाए और उन्हें कागजों में पुनः जीवित किया जाए।
लापरवाह सरपंच और सचिव के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्हें तमाम शासकीय योजनाओं और उनके पद का लाभ वापस दिलाया जाए।
एक निर्वाचित पंच सुरक्षित नहीं है और उसे अपनी मौजूदगी साबित करने के लिए कलेक्टर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, तो आम जनता का क्या हाल होगा? यह भ्रष्टाचार है या सिर्फ लिपिकीय त्रुटि, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
