
रतलाम। अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर आज रतलाम शहर पूरी तरह भक्ति, उत्साह और उमंग के रंगों में सराबोर नजर आया। बीते दिनों से घरों और सार्वजनिक पंडालों में विराजे रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान श्री गणेश की आज पूरे विधि-विधान और ढोल-धमाकों के साथ विदाई की गई।
सुबह से ही शहर के गली-मोहल्लों में “गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारे गूंजते रहे। क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग, युवा और महिलाएं—सभी बाप्पा की भक्ति में लीन होकर नाचते-गाते और एक-दूसरे को गुलाल लगाते हुए विसर्जन जुलूस में शामिल हुए। भक्तों ने आंखों में नमी और दिल में बाप्पा के प्रति अगाध श्रद्धा लिए उनसे सुख-समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद मांगा।
कालिका माता और हनुमान ताल पर एकत्रित हुईं प्रतिमाएं
पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित विसर्जन को ध्यान में रखते हुए नगर निगम प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। शहर के नागरिकों और समिति के सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों की गणेश प्रतिमाओं को नगर निगम द्वारा निर्धारित संग्रहण स्थलों—कालिका माता मंदिर परिसर और हनुमान ताल—पहुंचाया।
माही नदी में विसर्जन के लिए निगम ने की वाहन और टीम की व्यवस्था
हनुमान ताल और कालिका माता मंदिर परिसर में एकत्र की गई प्रतिमाओं को ससम्मान माही नदी तक ले जाने के लिए नगर निगम रतलाम द्वारा बड़े वाहनों और विशेष टीमों की तैनाती की गई थी। निगम की टीमों ने पूरी मर्यादा और सुरक्षा के साथ प्रतिमाओं को माही नदी में विसर्जन हेतु रवाना किया, ताकि नदी तट पर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा बनी रहे।
दिनभर चले विसर्जन के इस सिलसिले में शहर का माहौल पूरी तरह उत्सवमय बना रहा। भक्तों ने बाप्पा को मोदक और महाप्रसाद का भोग लगाकर इस आस के साथ विदाई दी कि आने वाला वर्ष सभी के जीवन में नई खुशियां और मंगल लेकर आएगा।
