
डिजिटल डेस्क: 21 वर्ष की युवा उम्र, इंग्लैंड की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र की डिग्री और स्विट्जरलैंड में लाखों के पैकेज वाली नौकरी का ऑफर—आमतौर पर कोई भी युवा ऐसा करियर छोड़ना नहीं चाहेगा। लेकिन कला, अध्यात्म और अपनी जड़ों के प्रति समर्पण की एक ऐसी ही मिसाल पेश की है युवा फिल्म प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने।
हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘हनुमान अंश’ की अभूतपूर्व सफलता के बाद निर्माता अनुप्रिया नागर देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। मुंबई के कला-प्रेमी परिवार से ताल्लुक रखने वाली अनुप्रिया की जीवन यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम रोमांचक और प्रेरणादायक नहीं है।
12 साल की उम्र से चित्रकारी, यूके में की पढ़ाई
मुंबई में जन्मी अनुप्रिया बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा की धनी रही हैं। महज 12 साल की उम्र से वे अपनी पेंटिंग्स की कमर्शियल प्रदर्शनियां (Exhibitions) लगा रही हैं। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने इंग्लैंड की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ’ (University of Bath) से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन (B.Sc) किया।
एक संभ्रांत परिवार से आने के बावजूद आत्मनिर्भरता की सोच रखने वाली अनुप्रिया ने यूके में पढ़ाई के दौरान 3 साल तक सेल्स एसोसिएट जैसी पार्ट-टाइम नौकरियां कीं और अपने खर्च खुद उठाए।
स्टीव जॉब्स और नीम करोली बाबा के प्रसंग ने बदला जीवन
इकोनॉमिक्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुप्रिया को ज्यूरिख (स्विट्जरलैंड) में कॉर्पोरेट आर्ट इंडस्ट्री से एक शानदार जॉब ऑफर मिला। वे स्विट्जरलैंड जाने की तैयारी में थीं, लेकिन यूनिवर्सिटी के एक असाइनमेंट के दौरान उनका सामना एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और उत्तराखंड के प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा के आध्यात्मिक संबंध से हुआ।
इस एक घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने विदेश में करियर बनाने के बजाय भारत लौटने और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक विरासत पर काम करने का फैसला किया। इसी प्रेरणा का परिणाम रही उनकी फिल्म ‘हनुमान अंश’।
सफलता के बाद लिया संत प्रेमानंद जी महाराज का आशीर्वाद
फिल्म की सफलता और कई राज्यों में मिल रहे प्रतिसाद के बाद भी अनुप्रिया सादगी भरा जीवन जीती हैं। हाल ही में वे अपनी पूरी टीम के साथ वृंदावन पहुंचीं, जहां उन्होंने संत प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर वहां मौजूद साधु-संतों द्वारा उनका सम्मान भी किया गया।
21 वर्ष की उम्र में अपनी काबिलियत और आस्था के बल पर इतिहास रचने वाली अनुप्रिया नागर आज देश के युवाओं के लिए भारतीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल बन चुकी हैं।
