
विशेष रिपोर्ट – इंसाइड न्यूज इंडिया
नई दिल्ली/रतलाम:
केंद्र सरकार का ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान आज देश के कोने-कोने में पहुंच चुका है। आज आम नागरिक को किसी भी काम के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। घर बैठे एक सिंगल क्लिक पर बैंकिंग से लेकर शॉपिंग और तमाम सरकारी सेवाएं उपलब्ध हैं। देश का सबसे बड़ा परिवहन क्षेत्र, यानी भारतीय रेलवे भी इसमें पीछे नहीं है। आज यात्री घर बैठे ट्रेन टिकट, पसंदीदा खाना (ई-कैटरिंग) और अपनी शिकायतें तक ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।
लेकिन इस डिजिटल क्रांति के बीच रेलवे का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा आज भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है। हम बात कर रहे हैं स्टेशनों पर लाल कपड़ों में सालों से यात्रियों की सेवा करने वाले हमारे ‘कुली’ (सहायकों) की। यात्रा के दौरान भारी-भरकम सामान की चिंता हर यात्री को होती है, लेकिन इस सेवा को अब तक पूरी तरह डिजिटल सिस्टम से नहीं जोड़ा गया है।
क्यों जरूरी है कुली सेवा का डिजिटलाइजेशन?
स्टेशनों पर अक्सर देखा जाता है कि ट्रेन आते ही कुली और यात्रियों के बीच सामान उठाने के दाम को लेकर मोल-भाव (bargaining), झिकझिक और कई बार बहसबाजी की स्थिति बन जाती है। कभी सवारी को लेकर कुलियों के आपसी विवाद तो कभी यात्रियों के साथ मनमुटाव की खबरें आम हैं।
यदि इस पूरी व्यवस्था को आईआरसीटीसी (IRCTC) ऐप या रेलवे की मुख्य वेबसाइट से जोड़ दिया जाए, तो यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो सकती है। जैसे यात्री टिकट बुक करते समय ‘लोअर बर्थ’ या ‘भोजन’ का विकल्प चुनते हैं, वैसे ही ‘बुक माई कुली’ (Book My Coolie) का विकल्प भी मिलना चाहिए।
पूर्व रेलवे सलाहकार समिति सदस्य मितेश अग्रवाल ने उठाई पुरजोर मांग
इस गंभीर और जनहित से जुड़े मुद्दे पर पूर्व रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य मितेश अग्रवाल ने सरकार और रेल मंत्रालय का ध्यान आकर्षित करते हुए एक बड़ी मांग रखी है।
”जब सरकार हर चीज को ऑनलाइन कर रही है, तो देश के इस सबसे बड़े और मेहनती वर्ग को डिजिटल मुख्यधारा से क्यों अलग रखा जाए? अगर रेलवे टिकट बुकिंग के समय ही वजन और नगो (नंबर ऑफ बैग्स) के हिसाब से कुली की बुकिंग और डिजिटल पेमेंट का विकल्प दे दे, तो इससे यात्रियों को स्टेशनों पर होने वाली मानसिक प्रताड़ना और मोल-भाव से मुक्ति मिल जाएगी। वहीं, हमारे कुली भाइयों को भी एक गरिमापूर्ण काम और निश्चित आय की गारंटी मिलेगी। यह कदम डिजिटल इंडिया के सपने को पूरी तरह साकार करेगा।”
— मितेश अग्रवाल, पूर्व सदस्य, रेलवे सलाहकार समिति
