
जीरन/नीमच:
रेल मंत्रालय की महत्वाकांक्षी नीमच-बांसवाड़ा-दाहोद-नंदुरबार (380 किमी) नई रेल लाइन परियोजना अब धरातल पर उतरने लगी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मंजूरी मिलने के बाद रेलवे की टीम ने नीमच के जीरन और आस-पास के क्षेत्रों में शुरुआती ग्राउंड सर्वे और ड्रोन मैपिंग का काम तेज कर दिया है।
जीरन क्षेत्र में मार्किंग शुरू, बदला जाएगा रूट
सूत्रों के अनुसार, यह नई रेल लाइन हरकियाखाल रेलवे स्टेशन के पास बनी पुलिया से आगे एक नए मार्ग (अलाइनमेंट) के रूप में बिछाई जाएगी, जो जीरन, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और दाहोद होते हुए नंदुरबार तक जाएगी।
सर्वे टीम ने जीरन क्षेत्र की तीन मुख्य सड़कों के पास मार्किंग
(चिन्हांकन) पूरी कर ली है:
जीरन से सकरानी रोड (लगभग 2 किमी दूर)
अरनिया बोराना रोड (लगभग 2 किमी दूर)
मल्हारगढ़ रोड पर धोकलखेड़ा फंटे के पास
सड़कों के साथ-साथ किसानों के खेतों में भी मार्किंग की जा रही है और सटीकता के लिए ड्रोन कैमरों से हवाई सर्वे किया जा रहा है।
रतलाम जंक्शन होगा बायपास, बचेगा समय
इस नई लाइन के बनने से नीमच-मंदसौर की तरफ से आने वाली ट्रेनों को रतलाम नहीं जाना पड़ेगा। ट्रेनें रतलाम जंक्शन को बायपास करते हुए सीधे दाहोद से जुड़ जाएंगी। यह मुंबई-दिल्ली मेन रूट को जोड़ने वाला सबसे छोटा रास्ता साबित होगा, जिससे दोनों महानगरों के बीच की दूरी और यात्रा समय में भारी कमी आएगी।
खनिज परिवहन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के आदिवासी बहुल इलाकों की तकदीर बदलेगा। बांसवाड़ा का पहाड़ी इलाका मैंगनीज, डोलोमाइट, चूना पत्थर, सोना और तांबा जैसे खनिजों से समृद्ध है, जिन्हें अब सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। योजना के तहत 3 राज्यों के 6 प्रमुख शहरों और 50 हजार से अधिक आबादी वाले कस्बों को जोड़ा जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन बढ़ेगा।
जीरन के लिए ऐतिहासिक पल:
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से जीरन का नाम देश के रेलवे मैप पर दर्ज हो जाएगा। क्षेत्र का व्यापारिक परिदृश्य बदलने और लंबी दूरी की ट्रेनों की सुविधा मिलने की उम्मीद में स्थानीय जनता और किसानों में भारी उत्साह है।
