
नई दिल्ली/धोलेरा:
अभी तक आपने अपने आस-पास कोई नई कॉलोनी कटते, नया हाईवे बनते या किसी इलाके को थोड़ा मॉडर्न होते देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूरे का पूरा एक ‘हाई-टेक शहर’ ज़ीरो से खड़ा किया जा रहा हो? जी हां, यह कोई साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं बल्कि भारत की धरती पर हकीकत बन रहा एक ऐसा अजूबा है, जो आने वाले समय में दुनिया के बड़े-बड़े शहरों को पीछे छोड़ देगा।
गुजरात के अहमदाबाद से करीब 100 किलोमीटर दूर, ‘धोलेरा’
(Dholera) नाम की जगह पर भारत का पहला प्लैटिनम-रेटेड ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी तैयार हो रहा है। इसके पैमाने और सुविधाओं को सुनकर आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे!
शंघाई से 6 गुना और दिल्ली से दोगुना बड़ा!
ज़रा सोचिए, देश की राजधानी दिल्ली कितनी विशाल है। धोलेरा का आकार दिल्ली से लगभग दोगुना और चीन के आधुनिक शहर शंघाई से छह गुना बड़ा (920 वर्ग किलोमीटर से अधिक) होने वाला है। यह सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि भारत का अपना ‘सुपर हब’ होगा, जिसे दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC) के मुख्य केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
हॉलीवुड फिल्मों जैसा ‘सिस्टम’: सब कुछ पूरी तरह ऑटोमैटिक
आमतौर पर शहरों में पहले आबादी बसती है और फिर सड़कें या सीवर बनते हैं, जिससे हमेशा खुदाई और जाम की स्थिति रहती है। लेकिन धोलेरा में ऐसा नहीं है! यहाँ सब कुछ एक तय सिस्टम के तहत ‘मास्टर प्लान’ के साथ बन रहा है।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर: जैसे फिल्मों में एक मुख्य कंट्रोल रूम से पूरे शहर पर नज़र रखी जाती है, वैसे ही धोलेरा में एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम होगा जो ट्रैफ़िक, सुरक्षा, बिजली और पानी की सड़कों के नीचे छिपी आधुनिक लाइनों को कंट्रोल करेगा।
6.5 किमी लंबा वॉटरफ्रंट: शहर की खूबसूरती बढ़ाने और बारिश के पानी के सही मैनेजमेंट के लिए एक शानदार नहर तट (कनाल फ्रंट) बनाया गया है, जो देखने में किसी विदेशी टूरिस्ट स्पॉट जैसा लगता है।
भारत का नया ‘सिलिकॉन वैली’ और ‘सेमीकंडक्टर हब’
दुनियाभर की बड़ी टेक कंपनियां अब धोलेरा का रुख कर रही हैं। यह शहर भारत की सेमीकंडक्टर (मशीनों और मोबाइल में लगने वाली चिप) बनाने की महत्वाकांक्षाओं का दिल बन चुका है। टाटा (Tata) और ताइवान की पीएसएमसी (PSMC) जैसी दिग्गज कंपनियां यहाँ भारत का पहला कमर्शियल सेमीकंडक्टर फैब (Fab) स्थापित कर रही हैं। अरबों डॉलर के इस निवेश से यहाँ लाखों हाई-टेक नौकरियां पैदा होने वाली हैं।
बुलेट जैसी रफ़्तार और खुद का इंटरनेशनल एयरपोर्ट
धोलेरा को दुनिया से जोड़ने के लिए एक बिल्कुल नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अहमदाबाद से जोड़ने के लिए एक एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं, शहर के अंदर आने-जाने के लिए अत्याधुनिक मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) और मोनोरेल चलाने की भी योजना है।
पूरी तरह ‘इको-फ्रेंडली’: सूरज की रोशनी से चमकेगा शहर
इतना बड़ा शहर प्रदूषण न फैलाए, इसके लिए यहाँ एक अल्ट्रा-मेगा सोलर पावर पार्क बनाया गया है। यानी शहर की ज़्यादातर बिजली सीधे सूरज की रोशनी से आएगी। यह पूरी तरह से एक ग्रीन और टिकाऊ शहर होगा।
निवेशकों के लिए ‘सोने की खदान’
इतनी आधुनिक सुविधाओं के बावजूद, सरकार उद्योग और विकास के लिए यहाँ बेहद किफायती दरों (लगभग ₹2750 प्रति वर्ग मीटर की आधार कीमत) पर ज़मीन आवंटित कर रही है। यही वजह है कि देश-विदेश की बड़ी-बड़ी विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स कंपनियां यहाँ अपना बेस बनाने के लिए लाइन लगाकर खड़ी हैं।
नज़रिया: धोलेरा इस बात का जीता-जागता सबूत है कि 21वीं सदी का भारत अब सिर्फ विदेशों के आधुनिक शहरों को देखकर हैरान नहीं होगा, बल्कि खुद ऐसे शहर बनाएगा जिसे देखने दुनिया के लोग भारत आएंगे। क्या आप तैयार हैं भारत के इस नए भविष्य को देखने के लिए?
