
- योगेश पंवार
आजकल सोशल मीडिया का ज़माना है, जहाँ बिना नमक-मिर्च के कोई खबर परोसी ही नहीं जाती। पिछले कुछ दिनों से व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से लेकर फेसबुक के गलियारों तक एक सनसनीखेज खबर तैर रही थी
— “महिलाओं ने गूगल पर 16.5 करोड़ बार सर्च किया कि मर्दों को बिना सबूत कैसे निपटाया जाए!” यह सुनते ही कई पतियों के हाथ से चाय का कप छूट गया और कइयों ने तो डर के मारे घर के सब्ज़ी काटने वाले चाकू तक छुपा दिए। पुरुषों के ग्रुप में माहौल ऐसा बन गया मानो हर घर में कोई गुप्त मिशन चल रहा हो!
लेकिन ज़रा ठहरिए, अपनी जान बचाने की फिक्र छोड़ने से पहले ‘आम आदमी का चश्मा’ लगाकर ज़रा सच देख लीजिए।
असलियत यह है कि यह पूरा दावा 100% फेक, फर्जी और मनगढ़ंत है। गूगल भैया ऐसे किसी जेंडर-बेस्ड (महिला या पुरुष के आधार पर) हत्या के नुस्खे वाले आंकड़े जारी ही नहीं करते। गूगल की असली ‘Year in Search’ रिपोर्ट उठाकर देखें तो भारत में लोग आईपीएल, गूगल जेमिनी, महाकुंभ, के-पॉप और क्रिकेटरों के बारे में सर्च कर रहे थे, न कि किसी को ठिकाने लगाने के तरीकों के बारे में।
गूगल कभी यह सार्वजनिक नहीं करता कि किस जेंडर के इंसान ने कौन सा सर्च किया है। 16 करोड़ का यह आंकड़ा सिर्फ सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने और लोगों को आपस में लड़ाने के लिए गढ़ा गया एक कोरा अफवाह था।
तो भैया, सार यह है कि सोशल मीडिया की हर तीखी-मसालेदार खबर पर आंख बंद करके भरोसा मत कीजिए। पत्नियों से डरने की जरूरत गूगल के डेटा से तो बिल्कुल नहीं है (बाकी आपकी व्यक्तिगत स्थिति आप खुद जानें)! व्हाट्सएप पर आने वाले हर ‘अटपटे दावे’ को सच मानने से पहले थोड़ा दिमाग का इस्तेमाल करें और अफवाहों के इस बाजार से दूर रहें।
